मंगलवार, 17 फ़रवरी 2009

मैं स्वयं महिमावंत हूँ|


बाहर की महिमा छोड़ ;वहाँ क्या है ? इसलिए पर की महिमा और आकर्षण छोड़कर एक बार परम ब्रह्म प्रभु निज आत्मा की महिमा लाकर अपने ज्ञान उपयोग को वहाँ जोड़ दे तो तेरी चार गति का भ्रमण मिट जायेगा
प्रथम तो मैं ज़रा भी पर का (अन्य का) नहीं और अन्य भी मेरा तनिक भी नहीं कारण कि सब ही द्रव्य तत्वत: पर के साथ समस्त सम्बन्ध से रहित है ; इसलिए इस षट द्रव्यात्मक विश्व में मेरी निज आत्मा से अन्य कोई भी मेरा नहीं

पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी

25 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

इसलिए इस षट द्रव्यात्मक विश्व में मेरी निज आत्मा से अन्य कोई भी मेरा नहीं
" kitna bdaa sach hai.."

Regards

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

उत्तम वचन!

Udan Tashtari ने कहा…

आभार इन सदवचनों के लिए.

Aarjav ने कहा…

भावों के उत्कृष्ट्ता और शब्दों का लास्य अद्भुत वातावरण बनाते है ! धन्यवाद !

Abhishek ने कहा…

मेरी निज आत्मा से अन्य कोई भी मेरा नहीं
सुंदर विचार प्रस्तुत किए हैं आपने.

शोभा ने कहा…

प्रेरणा दायक विचार।

राज भाटिय़ा ने कहा…

सत्यवचन.
धन्यवाद

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

अदभुत
आभार बेहतरीन पोस्ट के लिए

डुबेजी ने कहा…

nice post

Harsh pandey ने कहा…

aapki yah post achchi lagii

Harsh pandey ने कहा…

aapki yah post achchi lagii

Dev ने कहा…

बहुत अच्छा और बेहतरीन है
बधाई स्वीकारें

आशुतोष दुबे "सादिक" ने कहा…

प्रेरणा दायक विचार।

shama ने कहा…

Pradeepji,apke bogpe hamesha aatee hun aur kuchh na kuchh naya seekhneko milta hai...bohot shukrguzaar hun.....
aapki anusarkarta hun, lekin laakh koshish karkebhee, kewal "irshanaama"avtarit hua aur mujhe nahee maloom kaise, lekin mer apne naye blogs mese" sansmaran" bhee avtarit ho gaya....mera agyan zaahir hota hai in baatonse...aphi logonse dheere, dheere seekh rahee hun...
Unmukji, Sameerji, Paramjeetji,Shashtreeji, aur anya kaye bloggersne mujhe behad achhe sujhaw diye....jahan zaroorat thee wahan, tokabhi....sirf taeef karte to kaise seekh patee?
Ek baat aapko keh sakti hun? Please,Kshama karen,gar koyi mujhse galti ho jaye to..
Chand rachnayon ke baareme aapki yaa any logonki ID se, jo khabar miltee hai..."Aapki is .....rachnape,Pradeep Manoriya ne tippanee likhi hai",wo rachnayen meree nahee hain,shayad aapki galatfehmee ho gayi ho, isliye bataya....ise anyatha na len...ye vinamr binatee hai...

Babli ने कहा…

आप का ब्लोग मुझे बहुत अच्छा लगा और आपने बहुत ही सुन्दर लिखा है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

Sachin Malhotra ने कहा…

very nice blog.....

i have made a blog..
plz visit us my blog...
money saving....
http://savingsonline.blogspot.com/

thank you..

shama ने कहा…

Pradeepji...aapke kehne pe maine kavita kaa alag blog shuru kiya,lekin aapko wahan aajtak nahee paya !

Mere waise to kul 13 blogs hain..aapko "kavitaa" blog kee URL de rahee hun:

http//kavitasbyshama.blogspot.com

shayad,ek any blog apko pasand aa sakta hai:

http//aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

PGDCA University of Allahabad ने कहा…

BAHUT BADHIYA..........

JEEVAN KA SATYA .......

आकांक्षा~Akanksha ने कहा…

आप लिख ही नहीं रहें हैं, सशक्त लिख रहे हैं. आपकी हर पोस्ट नए जज्बे के साथ पाठकों का स्वागत कर रही है...यही क्रम बनायें रखें...बधाई !!
___________________________________
"शब्द-शिखर" पर देखें- "सावन के बहाने कजरी के बोल"...और आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाएं !!

ज्योति सिंह ने कहा…

aesa hi kuchh me bhi karana chahati thi magar meri ichchhao ka jahan basa dekh ati prasnnta hui .niti vachan jeevan sambhalne me sahayak hote hai .aap blog pe aaye khushi hui .

Vidhu ने कहा…

समस्त सम्बन्ध से रहित है ; इसलिए इस षट द्रव्यात्मक विश्व में मेरी निज आत्मा से अन्य कोई भी मेरा नहीं
satay vachan...

Dev ने कहा…

Pahadon me bagavan ki murti dekhane me bahut sundar lag rahi hai.. aur ya article bhi bahut knowladge dene wala hai...

Regards..

सतीश सक्सेना ने कहा…

अरे, कहाँ खो गए ?

बेनामी ने कहा…

This agency that if the Web log of their quotidian lives, poems, rants, opinions, chance that blogging offers them culture
medium in which to give tongue to themselves. It's no Red Tree, but awing every Missioner Baptist to do his Component in giving the gospel truth of Messiah to the unscathed creation.

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तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

सत्य वचन |

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