
जिसको दुःख का नाश करना हो उसको प्रथम क्या करना ? पर तरफ के विकल्पों को छोड़कर , राग का प्रेम तोड़कर उपयोग(ज्ञान) को अन्दर जोड़ना ...!!!! तीन लोक के नाथ सर्वज्ञ के पास भी हित की कामना रखना यह भी भ्रम है | शुभ अशुभ भाव का प्रसंग आवे तो भी उससे भिन्न रहकर " मैं तो ज्ञाता ही हूँ " |
पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी
4 टिप्पणियां:
उचित कथन। आभार।
sahi kathan....
बिलकुल सही
आभार!!
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