शुक्रवार, 23 जनवरी 2009

मैं जानने वाला हूँ



आबाल -गोपाल सब ही वास्तव में जानने वाले को ही जानते हैं | लेकिन इसको जानने का जोर दिखता नहीं , इससे यह राग, द्वेष,पुस्तक,वाणी हैं इसलिए मुझे इनका ज्ञान होता है , ऐसा इसका जोर (झुकाव) पर में ही जाता है , श्रद्धा में अपने
ज्ञान सामर्थ्य का विश्वास ही नहीं आता | इस कारण से वास्तव में जानने वाला ही जानता है ज्ञान से ही ज्ञान होता है यह इसको बैठता नहीं ..!  
विकृत (विपरीत) भावः से अपने को भेद ज्ञान द्वारा भिन्न अनुभवना बस यह ही करना योग्य है बाकी तो सब पर वस्तु भिन्न ही हैं ..!  
पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी

9 टिप्‍पणियां:

Anil Pusadkar ने कहा…

गणतंत्र दिवस की अग्रिम बधाई

Nirmla Kapila ने कहा…

mera bhi parnam svikaar karen gantantar divas ki shubhkaamnaayen

sanjay jain ने कहा…

निर्मल परिणाम हो अथवा कि मलिन परिणाम वह उसके स्वकाल में ही होता है
तीन लोक के नाथ सर्वज्ञ के पास भी हित की कामना रखना यह भी भ्रम है
आज के युग में मनुष्य अपने हित की कामनाओ की प्राप्ति हेतु इश्वर के पास जाता है परन्तु यह भूल जाता है कि तीन लोक के नाथ सर्वज्ञ ज्ञाता मात्र है और कोई भी जीव किसी का न तो भला कर सकता है और न ही बुरा /
गुरुदेव के अमृत वचनों को सही रूप से प्रस्तुत किया है आपका प्रयास सराहनीय है साथ में द्रष्टान्त भी देते तो सुंदर अभिव्यक्ति होती /

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर.
धन्यवाद

विनय ने कहा…

बहुत बढ़िया, गणतंत्र दिवस की बधाई

---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा!!

आशुतोष दुबे "सादिक" ने कहा…

aap ne bahut acchi baate likhi hai,aap kabhi mere blog ke follower baniye aap ka swagat hai.

Renu Sharma ने कहा…

shukriya ,
gantantr ki hardikshubhkamnayen .

intelligence ने कहा…

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