
आबाल -गोपाल सब ही वास्तव में जानने वाले को ही जानते हैं | लेकिन इसको जानने का जोर दिखता नहीं , इससे यह राग, द्वेष,पुस्तक,वाणी हैं इसलिए मुझे इनका ज्ञान होता है , ऐसा इसका जोर (झुकाव) पर में ही जाता है , श्रद्धा में अपने ज्ञान सामर्थ्य का विश्वास ही नहीं आता | इस कारण से वास्तव में जानने वाला ही जानता है ज्ञान से ही ज्ञान होता है यह इसको बैठता नहीं ..! विकृत (विपरीत) भावः से अपने को भेद ज्ञान द्वारा भिन्न अनुभवना बस यह ही करना योग्य है बाकी तो सब पर वस्तु भिन्न ही हैं ..!
पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी
8 टिप्पणियां:
गणतंत्र दिवस की अग्रिम बधाई
mera bhi parnam svikaar karen gantantar divas ki shubhkaamnaayen
निर्मल परिणाम हो अथवा कि मलिन परिणाम वह उसके स्वकाल में ही होता है
तीन लोक के नाथ सर्वज्ञ के पास भी हित की कामना रखना यह भी भ्रम है
आज के युग में मनुष्य अपने हित की कामनाओ की प्राप्ति हेतु इश्वर के पास जाता है परन्तु यह भूल जाता है कि तीन लोक के नाथ सर्वज्ञ ज्ञाता मात्र है और कोई भी जीव किसी का न तो भला कर सकता है और न ही बुरा /
गुरुदेव के अमृत वचनों को सही रूप से प्रस्तुत किया है आपका प्रयास सराहनीय है साथ में द्रष्टान्त भी देते तो सुंदर अभिव्यक्ति होती /
बहुत सुंदर.
धन्यवाद
बहुत बढ़िया, गणतंत्र दिवस की बधाई
---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें
उम्दा!!
aap ne bahut acchi baate likhi hai,aap kabhi mere blog ke follower baniye aap ka swagat hai.
shukriya ,
gantantr ki hardikshubhkamnayen .
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